यह कहानी है कामिल की एक ऐसे नौकर लड़के की जो अपने घर के लिए दिन रात मेहनत करता है अपनी मां का सहारा बनने के लिए खून पसीना एक करता है लेकिन नवाब की बेटी हाजरा उस पर जुल्म ढती है हर रोज उसे जलील करती है उसकी जिंदगी को जहन्नुम बनाती है उसके तानों से तंग आकर कामिल महल की नौकरी छोड़ देता है और खेती की राह पकड़ता है सोचता है कि शायद वहां सुकून मिले मगर वहां भी नवाब का रिश्तेदार मुनववर उसके पीछे पड़ जाता है उसकी मेहनत को तबाह करने की साजिश रचता है क्या कामिल अपने सब्र और हिम्मत से इन जुल्मों को हरा पाएगा यह जानने के लिए पूरी कहानी जरूर देखिए सुबह की पहली अजान ने उस शहर को जगाया जहां हवाएं मस्जिदों की मीनारों से टकराकर गूंज रही थी गलियों में ऊंटों की घंटियां और रह वालों की पुकार सुनाई दे रही थी एक नौजवान कामिल जिसके कंधों पर एक फटा हुआ कुर्ता और चेहरे पर मेहनत की लकीरें थी नवाब के महल की ओर बढ़ रहा था उसकी आंखों में एक खामोशी थी जो उसकी गरीबी के बावजूद उसके ईमान की गवाही देती थी कामिल 22 साल का नवाब मिर्जा शुजााउद्दीन के महल में नौकर था उसके वालिद का इंतकाल बचपन में हो गया था और उसकी मां ज़ैनब एक छोटी सी झोपड़ी में रहकर दूसरों के कपड़े सिलकर गुजारा करती थी कामिल अपनी मां का इकलौता सहारा था वह दिन रात मेहनत करता ताकि मां को दो वक्त की रोटी मिल सके नवाब मिर्जा एक नेक इंसान थे वह अपने नौकरों के साथ इंसाफ करते उनकी तनख्वाह समय पर देते और कभी-कभी उनके लिए हकीम भी बुलवाते मगर उनकी बेटी हाजरा अपने अब्बू से बिल्कुल उलट थी हाजरा 19 साल की एक ऐसी लड़की थी जिसका हुस्न बहुत ही खूबसूरत था और उसकी आंखें तलवार की तरह तेज थी मगर उसका मिजाज उतना ही सख्त था वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करती और खासतौर पर कामिल उसके गुस्से का शिकार बनता कभी वह उसके लाए फूलों में कमी निकालती तो कभी खाने की थाली में स्वाद का बहाना करती कामिल सब चुपचाप सह लेता क्योंकि उसके पास और कोई रास्ता नहीं था आज सुबह जब कामिल महल के बाग में पौधों को पानी दे रहा था हाजरा वहां आ पहुंची उसने गहरे नीले रंग का जोड़ा पहना था और हाथ में एक रेशमी पंखा लिए अपने चेहरे को हवा दे रही थी कामिल उसकी आवाज में एक तीखापन था जो कामिल के दिल में छुप गया यह फूल इतने बेकार क्यों हैं क्या तुझे नहीं पता कि मुझे बड़े और खुशबूदार फूल चाहिए कामिल ने सर झुकाए रखा और धीरे से बोला बेगम यह बाग के सबसे अच्छे फूल हैं मौसम इस साल थोड़ा सख्त है इसलिए फूल छोटे हैं हाजरा ने तकबुर भरे लहजे में कहा मौसम का बहाना मत बना तू जानता है कि मैं क्या चाहती हूं जा और शाम तक ढंग के फूल ले आ वरना तेरी नौकरी गई यह कहकर वह पलट कर चली गई कामिल वहीं खड़ा रहा हाथ में पानी का लोटा लिए अपने दिल में उठते तूफान को थामने की कोशिश करता हुआ उसके मन में सवाल उठ रहे थे क्या यही मेरी जिंदगी है हर रोज बेइज्जती सहना मेहनत का कोई मोल ना होना उसने सर उठाया और दूर मस्जिद की मीनार को देखा जहां से दूसरी अजान की आवाज आ रही थी उसने दिल ही दिल में दुआ मांगी या अल्लाह मुझे सब्र दे और मुझे इस जुल्म से निकलने का रास्ता दिखा हाजरा का जुल्म दिन-बदिन बढ़ता गया एक दिन जब कामिल ने गलती से एक पुराना चीनी मिट्टी का गुलदान छू लिया हाजरा ने उसे सबके सामने बेइज्जत किया तुझ जैसे नालायक को इस महल में जगह नहीं उसने चिल्लाकर कहा तुझे नहीं पता कि यह गुलदान मेरे अब्बू के लिए कितना कीमती है कामिल ने सर झुका कर माफी मांगी मगर उसका दिल टूट चुका था उस रात जब वह अपनी झोपड़ी में लौटा उसकी मां ने उसकी उदासी देख ली बेटा क्या बात है जैनब ने पूछा अपने सिलाई के काम को रोक कर कामिल ने गहरी सांस ली और बोला अम्मी मैं अब और नहीं सह सकता हाजरा बेगम हर रोज मुझे बेइज्जत करती है मैंने सोचा था कि मेहनत से सब ठीक हो जाएगा मगर अब लगता है कि यह मेरी जगह नहीं ज़ैनब ने अपने बेटे के कंधे पर हाथ रखा और बोली बेटा अल्लाह पर भरोसा रख अगर तेरा दिल कहता है कि यह रास्ता ठीक नहीं तो नया रास्ता चुन मगर अपने ईमान को कभी मत छोड़ना कामिल ने अगले दिन फैसला कर लिया वह नवाब मिर्जा के पास गया और बोला नवाब साहब आपने मुझे हमेशा इज्जत दी मगर मैं अब इस महल में काम नहीं कर सकता मेरे लिए यहां रहना मुश्किल हो गया है नवाब मिर्जा ने गहरी नजरों से कामिल को देखा बेटा मैं जानता हूं कि मेरी बेटी का मिजाज सख्त है तू एक अच्छा इंसान है अगर तू जाना चाहता है तो मैं तुझे नहीं रोकूंगा मगर मेरी एक गुजारिश है कभी मुश्किल पड़े तो मेरे पास आना कामिल ने नवाब का शुक्रिया अदा किया और महल छोड़ दिया उसने अपनी छोटी सी बचत से एक छोटा सा खेत किराए पर लिया और खेती शुरू की यह आसान नहीं था खेत में पानी की कमी थी और मौसम भी साथ नहीं दे रहा था मगर कामिल ने हार नहीं मानी बस सुबह से शाम तक मेहनत करता करता और हर रात मस्जिद में जाकर दुआ मांगता महल में हाजरा को कामिल के जाने का शुरुआत में कोई फर्क नहीं पड़ा वह अपने शौक नए जोड़े गहने और अपनी सखियों के साथ हंसीज़ाक में मशगूल रही मगर कुछ हफ्तों बाद उसे एक अजीब सी कमी महसूस होने लगी बाग के फूल अब उतने ताजे नहीं लगते थे खाने की थाली में पहले जैसा जायका नहीं था और सबसे अजीब बात उसे कामिल की वो खामोशी वाली मुस्कान याद आने लगी जो वह पहले नफरत से देखती थी एक दिन जब हाजरा बाजार में अपनी दोस्त नूरजहां के साथ गई उसने दूर से कामिल को देखा वह एक छोटे से खेत में काम कर रहा था उसका चेहरा पसीने से तर था मगर उसकी आंखों में एक सुकून था हाजरा को अजीब सा लगा उसने नूरजहां से पूछा यह कामिल अब यहां क्या कर रहा है नूरजहां ने जवाब दिया सुना है उसने नौकरी छोड़ दी और अब खेती कर रहा है लोग कहते हैं जो वह दिन रात मेहनत करता है और उसकी फसलें अब अच्छी होने लगी हैं हाजरा ने कुछ नहीं कहा मगर उसके दिल में एक चुभन सी हुई उसे याद आया कि कैसे उसने कामिल को बार-बार बेइज्जत किया था उसे एहसास हुआ कि शायद उसकी सख्ती की वजह से ही कामिल ने महल छोड़ा उस रात वह अपने कमरे में बैठी और पहली बार उसने अपने आप से सवाल किया क्या मैंने गलत किया कुछ महीने बीत गए कामिल की मेहनत रंग लाई और उसका खेत अब हराभरा होने लगा उसकी फसलें बाजार में अच्छे दामों पर बिक रही थी लोग उसकी मेहनत और ईमानदारी की तारीफ करने लगे मगर एक रात एक तूफान ने उसके खेत को तबाह कर दिया कामिल निराश हो गया मगर उसने हिम्मत नहीं हारी उसने अपने दोस्त यूसुफ जो एक छोटा सा ताजिर था उससे मदद मांगी यूसुफ ने उसे कुछ बीज और औजार उधार दिए और कामिल ने फिर से मेहनत शुरू कर दी इधर हाजरा का दिल बदल रहा था एक दिन वह मस्जिद के पास से गुजरी तो उसने देखा कि कामिल वहां गरीब बच्चों को कुरान की तालीम दे रहा था वह मुफ्त में बच्चों को पढ़ाता और उसकी आवाज में एक अजीब सा सुकून था हाजरा ने उसे चुपके से देखा और उसका दिल पिघलने लगा उसे एहसास हुआ कि कामिल का दिल कितना बड़ा है उसने सोचा मैंने उसे इतना सताया फिर भी उसने कभी मुझसे बदला लेने की नहीं सोची एक दिन हाजरा ने हिम्मत जुटाई और कामिल के खेत पर गई वहां उसने देखा कि कामिल एक टूटे हुए कुएं को ठीक करने की कोशिश कर रहा था उसने धीरे से कहा कामिल मुझे माफ कर दे मैंने तुझ पर बहुत जुल्म किया कामिल ने उसे देखा और हल्के से मुस्कुराया हाजरा बेगम जो बीत गया उसे भूल जाइए मैंने आपको माफ कर दिया हाजरा की आंखों में आंसू थे उसने कहा मैं तुम्हारी मदद करना चाहती हूं मुझे नहीं पता कैसे लेकिन मैं चाहती हूं कि तेरा खेत फिर से हराभरा हो कामिल ने कुछ पल सोचा और बोला आपकी दुआएं ही काफी हैं हाजरा का यह नया रूप कामिल के लिए अजूबा था वह सोच में पड़ गया कि क्या हाजरा का यह बदलाव सच्चा है या यह बस एक पल का जोश है उसने अपने दिल को समझाया कि उसे हाजरा पर भरोसा करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए फिर भी हाजरा की बातों में एक सच्चाई थी जो उसे बार-बार सोचने पर मजबूर कर रही थी हाजरा ने अगले कुछ दिनों में कामिल के खेत पर आना शुरू कर दिया वह छोटी-मोटी मदद करती जैसे पानी के मटके भरना या फसलों के बीज खरपतवार निकालना शुरुआत में कामिल को यह अजीब लगा लेकिन धीरे-धीरे उसे हाजरा की मेहनत में इखलास नजर आने लगा एक दिन जब हाजरा ने अपने नाजुक हाथों से मिट्टी में काम करने की कोशिश की तो उसके हाथों में छाले पड़ गए कामिल ने यह देखा और तुरंत पास की नदी से ठंडा पानी लाकर उसके हाथ धुलवाए बेगम यह काम आपके लिए नहीं है कामिल ने नरम लहजे में कहा "आपके हाथ इतने नाजुक हैं यह मिट्टी और पत्थर इन्हें तकलीफ देंगे " हाजरा ने मुस्कुरा कर जवाब दिया कामिल अगर तू इतनी मुश्किलों में मेहनत कर सकता है तो मैं भी थोड़ा सा तो कर ही सकती हूं मैं चाहती हूं कि तेरा खेत लहलहाए और मैं इसमें हिस्सा बनूं कामिल ने कुछ नहीं कहा लेकिन उसकी आंखों में हाजरा के लिए एक नया सम्मान जागा उसी रात जब वह मस्जिद में नमाज पढ़ने गया उसने अल्लाह से दुआ मांगी या अल्लाह मुझे सही और गलत का फर्क दिखा अगर हाजरा का दिल सच्चा है तो मुझे रास्ता दिखा कामिल की मेहनत फिर से रंग लाने लगी थी उसका खेत अब गेहूं और जौ की फसलों से हराभरा हो रहा था बाजार में उसकी फसलों की मांग बढ़ने लगी और उसका नाम पूरे इलाके में फैल गया मगर जहां कामयाबी आती है वहां जलन भी पीछे-पीछे आती है एक इलाके का जमींदार मुनववर खान जो नवाब मिर्जा का दूर का रिश्तेदार था कामिल की तरक्की से जलने लगा मुनववर एक चालाक और लालची इंसान था जो हमेशा नवाब की दौलत और रुतबे पर नजर रखता था उसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ कि एक मामूली नौकर अब उसकी बराबरी की बातें करने लगा मुनववर ने अपने आदमियों को कामिल के खेत को नुकसान पहुंचाने का हुक्म दिया एक रात जब चांद बादलों में छिपा था मुनववर के आदमियों ने कामिल के खेत में आग लगा दी सुबह जब कामिल अपने खेत पर पहुंचा तो उसका दिल टूट गया उसकी महीनों की मेहनत राख में मिल गई थी वह जमीन पर बैठ गया और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे हाजरा को जब इस हादसे की खबर मिली तो वह तुरंत कामिल के खेत पर पहुंची उसने कामिल को उदास बैठा देखा और उसके पास जाकर बोली कामिल हिम्मत मत हार यह जो हुआ यह अल्लाह की मर्जी है हम फिर से मेहनत करेंगे मैं तेरे साथ हूं कामिमिल ने हाजरा की ओर देखा उसकी बातों में एक अजीब सा सुकून था उसने कहा "हाजरा बेगम तुम क्यों मेरी इतनी फिक्र करती हो?" मैं एक गरीब इंसान हूं और तुम नवाब की बेटी हाजरा ने गहरी सांस ली और बोली कामिल मैंने तुझ पर बहुत जुल्म किए मगर अब मैंने जाना कि असली दौलत दिल की होती है और तेरा दिल सोने से भी कीमती है मैं चाहती हूं कि तू कामयाब हो और मैं उसमें तेरा साथ दूं हाजरा ने अपने अब्बू नवाब मिर्जा को कामिल के खेत की बर्बादी के बारे में बताया नवाब मिर्जा ने जब यह सुना तो वह तुरंत हरकत में आए उन्होंने अपने आदमियों को हुक्म दिया कि इस हादसे की तहकीकात की जाए कुछ ही दिनों में पता चला कि मुनववर खान इसके पीछे था नवाब मिर्जा ने मुनववर को अपने दरबार में बुलाया और सख्ती से पूछा मुनववर तूने गरीब की मेहनत को क्यों राख में मिलाया मुनववर ने झूठ बोलने की कोशिश की मगर नवाब के पास सबूत थे नवाब ने मुनववर को सजा दी और उससे कामिल के नुकसान की भरपाई करवाई मुनववर को ना सिर्फ कामिल को नए बीज और औजार देने पड़े बल्कि उसे पूरे इलाके के सामने कामिल से माफी भी मांगनी पड़ी नवाब मिर्जा ने कामिल को अपने महल में बुलाया और बोले बेटा मैंने तुझे पहले कहा था कि मुश्किल में मेरे पास आना अब मैं तुझे अपने खेत का एक हिस्सा देता हूं ताकि तू अपनी मेहनत को और आगे बढ़ा सके कामिल ने नवाब का शुक्रिया अदा किया मगर उसने इज्जत से कहा नवाब साहब आपका बहुत एहसान है मगर मैं अपनी मेहनत से ही कुछ करना चाहता हूं आपकी दुआएं मेरे लिए काफी हैं नवाब मिर्जा ने कामिल की ईमानदारी देखकर मुस्कुराया और बोले तू सच्चा इंसान है कामिल अल्लाह तुझे कामयाबी दे हाजरा का कामिल के लिए प्यार अब और गहरा हो गया था वह हर रोज उसके खेत पर जाती और दोनों मिलकर काम करते धीरे-धीरे कामिल का दिल भी हाजरा की ओर झुकने लगा उसे हाजरा की सादगी उसका बदलाव और उसकी मेहनत में एक सच्चाई नजर आई मगर वह अपने दिल को बार-बार समझाता कि वह और हाजरा दो अलग-अलग दुनिया के लोग हैं एक गरीब किसान और एक नवाब की बेटी क्या यह मुमकिन है एक दिन जब दोनों एक पेड़ की छांव में बैठे थे हाजरा ने हिम्मत जुटाकर कहा कामिल मैं तुझसे कुछ कहना चाहती हूं मैंने तुझ पर बहुत जुल्म किए मगर अब मेरा दिल तुझसे मोहब्बत करता है मैं नहीं जानती कि तू मेरे बारे में क्या सोचता है मगर मैं यह बात अपने दिल में नहीं रख सकती थी कामिल हैरान रह गया उसने कुछ पल चुप रहकर हाजरा की ओर देखा और फिर बोला हाजरा बेगम मैं एक गरीब इंसान हूं तुम नवाब की बेटी हो तुम्हारा और मेरा रास्ता अलग है मैं तुम्हारी इज्जत करता हूं मगर यह मोहब्बत यह मुमकिन नहीं हाजरा की आंखों में आंसू आ गए उसने कहा कामिल मोहब्बत रुतबे नहीं देखती अगर तेरा दिल भी मेरे लिए कुछ महसूस करता है तो मुझे और कुछ नहीं चाहिए कामिल ने कुछ नहीं कहा मगर उसका दिल तेजी से धड़क रहा था उस रात वह मस्जिद में गया और लंबी दुआ मांगी या अल्लाह मुझे सही रास्ता दिखा अगर यह मोहब्बत सच्ची है तो इसे मंजिल तक पहुंचा हाजरा की मोहब्बत का इजहार कामिल के लिए एक नया इम्तिहान था वह जानता था कि हाजरा का दिल सच्चा है मगर शहर की नजरें और रिवाजों की दीवारें उनकी राह में रुकावट बन सकती थी उसने अपने दोस्त यूसुफ से इस बारे में बात की यूसुफ जो कामिल का पुराना दोस्त और एक नेक दिल ताजिर था उसने कहा कामिल मोहब्बत आसान नहीं होती अगर तू हाजरा से सच्चा प्यार करता है तो तुझे शहर से लड़ना होगा मगर पहले अपने दिल से पूछ कि क्या तू इसके लिए तैयार है कामिल ने यूसुफ की बातों पर गौर किया उस रात जब वह अपनी मां ज़ैनब के पास गया उसने अपनी परेशानी बताई ज़ैनब ने गहरी सांस ली और बोली बेटा मोहब्बत अल्लाह का तोहफा है मगर यह तोहफा इम्तिहानों के साथ आता है अगर तू हाजरा से प्यार करता है तो अपने ईमान को साथ रख अल्लाह जो चाहेगा वही होगा इधर हाजरा ने भी अपने दिल की बात अपनी दोस्त नूरजहां को बताई नूरजम जो एक समझदार और सुलझी हुई लड़की थी उसने हाजरा को समझाया हाजरा तूने कामिल पर बहुत जुल्म किए अब अगर तू उससे मोहब्बत करती है तो तुझे अपने अब्बू और समाज को मनाना होगा यह आसान नहीं होगा मगर अगर तेरा प्यार सच्चा है तो अल्लाह रास्ता बनाएगा हाजरा ने फैसला किया कि वह अपने अब्बू से बात करेगी एक शाम जब नवाब मिर्जा अपने बाग में टहल रहे थे हाजरा ने हिम्मत जुटाई और उनके पास गई उसने कहा अब्बू मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं मैं मैं कामिल से मोहब्बत करती हूं नवाब मिर्जा ने अपनी बेटी की ओर देखा उनकी आंखों में हैरानी थी मगर साथ ही एक नरमी भी उन्होंने कहा हाजरा तू मेरी लाडली बेटी है मैं तुझे दुखी नहीं देख सकता मगर तू जानती है कि हमारा समाज ऐसी मोहब्बत को आसानी से कबूल नहीं करता कामिल एक अच्छा इंसान है मगर वो एक गरीब किसान है क्या तू उसकी जिंदगी की मुश्किलों को बर्दाश्त कर सकेगी हाजरा ने नवाब से कहा अब्बू मैंने कामिल के साथ वक्त बिताया है मैंने उसकी मेहनत और ईमानदारी देखी है मेरे लिए उसका दिल ही काफी है मैं उसकी हर मुश्किल में साथ दूंगी नवाब मिर्जा ने कुछ पल सोचा और बोले ठीक है बेटी मैं कामिल से बात करूंगा मगर यह फैसला आसान नहीं होगा हमें समाज की बातों का सामना करना पड़ेगा जब मुनववर खान को पता चला कि हाजरा और कामिल के बीच मोहब्बत की बातें चल रही हैं उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया वह पहले ही कामिल से जलता था और अब यह खबर उसे और भड़का गई उसने सोचा कि अगर हाजरा और कामिल का रिश्ता कबूल हो गया तो नवाब की दौलत और रुतबा उसकी पहुंच से और दूर हो जाएगा उसने एक नई साजिश रची मुनववर ने इलाके के कुछ मजबूत लोगों को अपने साथ मिलाया और अफवाहें फैलानी शुरू की कि कामिल एक धोखेबाज है जो नवाब की बेटी को फंसाकर उनकी दौलत हड़पना चाहता है यह अफवाहें जल्दी ही पूरे इलाके में फैल गई लोग कामिल के खिलाफ बोलने लगे और उसकी फसलों की मांग बाजार में कम होने लगी कामिल को जब इसकी खबर मिली तो वह परेशान हो गया उसने यूसुफ से कहा मैंने हमेशा ईमानदारी से काम किया फिर लोग मेरे बारे में ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं यूसुफ ने जवाब दिया कामिल यह सब मुनववर की चाल है वो तुझसे जलता है हमें इसका सामना करना होगा हाजरा ने भी यह अफवाहें सुनी वह तुरंत कामिल के पास गई और बोली कामिल मैं इन अफवाहों को सच नहीं मानती तू एक सच्चा इंसान है और मैं तेरे साथ हूं " कामिल ने हाजरा की बातों से हिम्मत पाई उसने कहा हाजरा बेगम तुम्हारा भरोसा मेरे लिए बहुत मायने रखता है मैं इन अफवाहों से नहीं डरता अल्लाह मेरे साथ है नवाब मिर्जा ने कामिल को अपने महल में बुलाया और उससे अकेले में बात की उन्होंने कहा कामिल मैं जानता हूं कि तू एक ईमानदार इंसान है मगर मेरी बेटी से मोहब्बत का रास्ता आसान नहीं है लोग बातें कर रहे हैं और मुनववर ने अफवाहें फैलाई हैं मैं चाहता हूं कि तू अपने प्यार को साबित करें कामिल ने कहा नवाब साहब मैं हाजरा बेगम की इज्जत करता हूं अगर आप मुझे मौका देंगे तो मैं साबित करूंगा कि मेरा प्यार सच्चा है नवाब मिर्जा ने एक शर्त रखी उन्होंने कहा कामिल अगर तू अपने खेत को अगले छ महीनों में फिर से हराभरा कर दे और अपनी मेहनत से इलाके के लोगों का भरोसा जीत ले तो मैं तुम दोनों के रिश्ते को कबूल करूंगा कामिल ने यह शर्त कबूल की उसने दिन रात मेहनत शुरू कर दी हाजरा भी उसके साथ खेत में काम करने लगी दोनों ने मिलकर टूटे हुए कुएं को ठीक किया नई फसलें बोई और पानी की व्यवस्था के लिए एक छोटा सा नहर सिस्टम बनाया उनकी मेहनत को देखकर इलाके के लोग धीरे-धीरे कामिल के बारे में अपनी राय बदलने लगे 6 महीने बाद कामिल का खेत फिर से लहलहाने लगा उसकी फसलें बाजार में पहले से भी ज्यादा मांग में थी मुनववर की अफवाहें धीरे-धीरे दब गई क्योंकि लोग कामिल की ईमानदारी और मेहनत को देख चुके थे हाजरा की मेहनत ने भी लोगों का दिल जीत लिया वह अब पहले वाली जिद्दी और मगरूर हाजरा नहीं थी उसका दिल बदल चुका था और लोग उसकी सादगी की तारीफ करने लगे नवाब मिर्जा ने कामिल और हाजरा को अपने महल में बुलाया उन्होंने कहा कामिल तूने मेरी शर्त पूरी की तूने ना सिर्फ अपने खेत को हराभरा किया बल्कि मेरी बेटी का दिल भी जीता मैं तुम दोनों के रिश्ते को कुबूल करता हूं हाजरा की आंखों में खुशी के आंसू थे कामिल ने नवाब का शुक्रिया अदा किया और बोला नवाब साहब मैं वादा करता हूं कि मैं हाजरा की हमेशा इज्जत और हिफाजत करूंगा कामिल और हाजरा की शादी पूरे इलाके में एक मिसाल बन गई लोग उनकी मोहब्बत सब्र और मेहनत की कहानी सुनाने लगे मुनववर खान जो अपनी साजिशों में नाकाम रहा चुपके से इलाके से चला गया नवाब मिर्जा ने कामिल को अपने खेत का एक हिस्सा तोहफे में दिया मगर कामिल ने अपनी मेहनत से उसी खेत को और समृद्ध किया हाजरा और कामिल ने मिलकर ना सिर्फ अपने खेत को बल्कि अपने आसपास के गरीब किसानों को भी मदद देना शुरू किया उन्होंने एक छोटा सा स्कूल खोला जहां गरीब बच्चे मुफ्त में कुरान और दूसरी तालीम हासिल कर सकते थे उनकी जिंदगी अब मोहब्बत ईमान और मेहनत का एक खूबसूरत मिसाल बन गई थी हर रात जब कामिल और हाजरा अपने खेत की छत पर बैठकर तारों को देखते वे अल्लाह का शुक्र अदा करते कामिल कहता हाजरा यह सब अल्लाह की मेहरबानी है उसने हमें एक दूसरे का साथ दिया हाजरा मुस्कुरा कर जवाब देती कामिल तेरा सब्र और मेहनत मेरे लिए सबसे बड़ी दौलत है शादी के कुछ महीने बाद कामिल और हाजरा की जिंदगी में नई जिम्मेदारियां आ गई हाजरा अब ना सिर्फ एक बीवी थी बल्कि उसने गांव की औरतों को इकट्ठा करके एक छोटा सा सिलाई का मरकज शुरू किया वह चाहती थी कि गरीब औरतें अपने बलबूते पर खड़े रहे जैसा कि उसने कामिल की मेहनत से सीखा था वह हर दिन औरतों को सिलाई सिखाती और उनकी बनाई चीजें बाजार में बेचने में मदद करती कामिल ने अपने खेत को और बड़ा करने का फैसला किया उसने नवाब मिर्जा के दिए हुए खेत के हिस्से को मजीद तरक्की दी और अब वह ना सिर्फ अनाज ही नहीं बल्कि फल और सब्जियों भी उगाने लगा उसकी मेहनत ने गांव के दूसरे किसानों को भी मुतासिर किया और कई लोग उसके पास सलाह लेने आने लगे कामिल ने कभी किसी को निराश नहीं किया वह अपनी जानकारी और तजुर्बा खुलकर बांटता मगर जिंदगी का हर मोड़ आसान नहीं होता एक दिन खबर आई कि मुनववर खान वापस लौट आया है उसने एक नया चेहरा बनाया था और अब वह एक बड़े ताजिर के रूप में इलाके में वापस आया था उसने दावा किया कि वह बदल चुका है और अब वह गांव की भलाई के लिए काम करना चाहता है मगर कामिल और हाजरा को उसकी बातों पर भरोसा नहीं था मुनववर ने अपनी नई साजिश शुरू की उसने गांव के कुछ किसानों को लालच देकर अपने साथ मिलाया और कामिल के खेतों के लिए पानी की सप्लाई रोकने की कोशिश की उसने नहर के रास्ते में रुकावटें डलवाई ताकि कामिल की फसलें सूख जाएं जब कामिल को इसकी खबर मिली तो वह परेशान हो गया उसने यूसुफ और कुछ गांव वालों के साथ मिलकर नहर को फिर से खोलने की कोशिश की मगर मुनववर के आदमियों ने उन पर हमला कर दिया इस हमले में यूसुफ को चोट लगी और कामिल को भी मामूली चोटें आई हाजरा जो उस वक्त खेत पर थी उसने यह सब देखा और तुरंत नवाब मिर्जा को खबर दी नवाब मिर्जा ने अपने सिपाहियों को भेजा और मुनववर के आदमियों को पकड़ लिया गया मुनववर को फिर से दरबार में बुलाया गया इस बार नवाब मिर्जा का गुस्सा साफ नजर आ रहा था मुनववर तूने पहले भी कामिल को नुकसान पहुंचाया और अब फिर वही हरकत कर रहा है नवाब ने सख्त लहजे में कहा इस बार मैं तुझे माफ नहीं करूंगा मुनववर ने माफी मांगी मगर उसकी बातों में अब कोई सच्चाई नहीं थी नवाब मिर्जा ने उसे इलाके से हमेशा के लिए निकाल दिया और उसकी जमीन जब्त कर ली इस जमीन को नवाब ने गांव के गरीब किसानों में बांट दिया ताकि वे अपनी मेहनत से उसे खुशहाल करें