कहानी सोफियान कि

यह कहानी है सोफियान की। एक ऐसा गरीब लड़का जिसके अपने भाई उसे घर से निकाल देते हैं। उसकी बीवी नफीसा पर झूठा चोरी का इल्जाम लगाकर। सोफियान अपनी बीवी को लेकर दूसरे शहर जाता है। वहां दिन रात काम ढूंढता है ताकि कुछ पैसे कमा सके। फिर एक सोने का उस्ताद उसे काम सिखाता है। एक दिन काम सीखते-सीखते एक नवाब का कीमती कंगन उसके हाथ से टूट जाता है। उस्ताद उसे दुकान से निकालने की धमकी देता है। फिर भी उसकी बीवी नफीसा उसका साथ नहीं छोड़ती है। हर मुश्किल में उसका साथ देती है। क्या सोफियान इन सब परेशानियों से लड़ पाएगा या फिर उसका ईमान हार जाएगा? यह जानने के लिए पूरी कहानी जरूर देखिए। एक पुराने शहर में जहां तंग गलियां आम पुरानी इमारतों के साए में छुपी थी। एक सादा सा घर खड़ा था। घर एक छोटी सी गली के कोने में था। जहां सुबह की अजान मस्जिद के मीनार से उतरती और हर घर के दरवाजे तक पहुंचती। मस्जिद का मीनार शहर का दिल था। उसकी आवाज हर दिल में एक सुकून भर देती। घर में तीन भाई रहते थे। सबसे बड़ा अहमद जो कपड़े के तिजारत में नाम कमा चुका था। उसकी दुकान बाजार के सबसे बड़े हिस्से में थी। जहां रेशमी कपड़े, जरी के जोड़े और रंग बिरंगे शॉल बिकते और लोग उसकी दुकान के बाहर खड़े होकर कपड़ों की तारीफ करते। अहमद का चेहरा सख्त था। आवाज में वजन और वो घर का मुखिया था। फैसले करता और परिवार को संभालता। दूसरा भाई करीम एक मजदूर जो सुबह से शाम तक मेहनत करता। कभी इमारतों के लिए पत्थर उठाता, कभी ताजिरों के लिए भारी सामान ढोता। उसका चेहरा थकान से भरा रहता। पसीने से तर लेकिन उसकी मेहनत से घर के खर्चे चलते और सबसे छोटा सोफियान था जिसका चेहरा हमेशा नूरानी रहता बातें नेक और अमल पाक सोफियान का दिल कुरान के नूर से रोशन था वो सुबह फज्र की नमाज के लिए जल्दी उठता वजू करता और मस्जिद की तरफ चलता उसके कदम धीमे लेकिन पक्के जैसे हर कदम के साथ अल्लाह की याद उसके साथ हो मस्जिद के अंदर वो नमाज पढ़ता कुरान की तिलावत करता सूर सूर यासीन के शब्द उसके दिल से दिल तक उतरते। नमाज के बाद वो दुआ मांगता हाथ उठाए या अल्लाह मेरे परिवार को सुकून दे। हमें हिदायत अता फरमा। रिज़्क और सेहत दे। वापस घर आकर वो आंगन में बैठता जहां धूप की किरणें जमीन पर नाच रही होती और नीम का पेड़ हवा में झूमता। उसकी पत्तियां जमीन पर हल्की सी छाया बनाती। चाय का प्याला हाथ में लेकर वह नफीसा से बातें करता। नफीसा उसकी बीवी एक खुशनुमा और ईमान वाली औरत अपने शौहर के लिए हमेशा दुआएं करती। वो सुबह उठकर रसोई में चली जाती जहां लोहे के तवे पर रोटी बेलती, दाल चढ़ाती और सब्जी के टुकड़े काटती एक पुरानी छुरी से उसकी आवाज रसोई में गूंजती। उसका चेहरा सादा था लेकिन आंखों में एक गहरा दुख छुपा था। परिवार का तनाव और घर के झगड़े वो कहती सोफियान आज मस्जिद में दुआ करना शायद अल्लाह सुकून दे। सोफियान मुस्कुराता इंशा अल्लाह नफीसा अल्लाह सुनेगा हर जुम्मा को मस्जिद में जाकर वो अल्लाह से सुकून और बरकत की दुआ करते लेकिन घर का माहौल ठंडा ना होता नफीसा रात को चुपके से रोती अपने आंसू छुपाती और सोफियान उसे तसल्ली देता नफीसा अल्लाह का वक्त है सब्र करो वो हम पर रहम करेगा जैसे हजरत अय्यूब अलैहिस्सलाम पर किया वो सूर अशर पढ़ता इन्ना मल दूसरी युसरा बेशक हर मुश्किल के साथ आसानी है और दोनों एक दूसरे के साथ उम्मीद बांधते। घर में सोफियान के सिवा कोई भी नफीसा को पसंद ना करता। अहमद की बीवी ज़ैनब और करीम की बीवी फातिमा उससे जलती थी। ज़ैनब का चेहरा हमेशा गुस्से से भरा रहता। वो कहती, नफीसा घर में फितना फैलाती है। इसकी वजह से सुकून नहीं। फातिमा भी ताने मारती। यह औरत घर को बर्बाद कर रही है। इसकी वजह से सब परेशान हैं। नफीसा दिन भर घर का काम करती। सुबह से शाम तक बर्तन माजती, खाना बनाती, कपड़े धोती और घर के छोटे-मोटे काम संभालती। एक सुबह ज़ैनब ने चिल्लाया, नफीसा, तूने मेरा शॉल गलत धोया, दाग लग गया। नफीसा ने माफी मांगी। भाभी गलती हो गई। मैं दोबारा धोती हूं। लेकिन ज़ैनब ने बात बढ़ा दी। तू हमेशा गलतियां करती है। घर की बोझ है तू। अहमद और करीम भी उससे नफरत करते। अहमद कहता सोफियान यह औरत तुझे बर्बाद करेगी। इसे घर से निकाल दे। करीम ताना मारता तुझसे शादी करके इसने क्या दिया? सिर्फ परेशानी और झगड़ा। सोफियान अपनी बीवी का दिफा करता। कहता भाई नफीसा मेरी जिम्मेदारी है। उस पर इल्जाम मत लगाओ। अल्लाह देख रहा है। वो इंसाफ करेगा। लेकिन रोज का झगड़ा उसके दिल को थका देता। वो रात को कुरान खोला। सूर अल बकरा की आयत पढ़ी। [संगीत] शन अल खौफ व अल नमली व अलफसी व अलमाराती व बशरी अल साबरीन और हम तुम्हें आजमाएंगे कुछ डर भूख माल के नुकसान जान के नुकसान और फलों के नुकसान से और खुशखबरी दे सब्र करने वालों को और सब्र मांगा या अल्लाह मुझे हिम्मत दे दिल को सुकून दे सोफियान की जिंदगी सादी थी लेकिन उसमें एक खुशी थी ईमान की खुशी सुबह फज्र की नमाज के बाद वो चाय का प्याला हाथ में लेकर घर के आंगन में बैठता जहां चिड़ियों की चहचहट और धूप की हल्की गर्मी दिल को सुकून देती। नफीसा के साथ बातें करता कभी उसकी तबीयत के बारे में कभी घर के खर्चों के बारे में कभी मस्जिद के इमाम के खुदबे के बारे में जो उसने पिछले जुम्मा सुना था। फिर वह अपनी छोटी सी बर्तनों की दुकान पर चला जाता। जो बाजार के एक पुराने हिस्से में थी। जहां पुरानी दुकानें एक दूसरे से सटी हुई थी। दुकान छोटी थी लेकिन वहां पुरानी देखचियों की चमक और थालों की खनक लोगों को खींचती। सुबह 10:00 बजे दुकान खुलती। सोफियान सामान सजाता। लोहे के थाल, पीतल की देखची, चांदी के चम्मच और एक पुराना समोवार जो लोग चाय के लिए पसंद करते हैं। कस्टमर आते बातें करते। एक दिन एक बुजुर्ग आदमी आया। उसका चेहरा सफेद दाढ़ी से रोशन। कहता बेटा एक मजबूत देखची चाहिए जो खाना जल्दी गर्म करे और लंबी चले। सोफियान मुस्कुराता चाचा यह लीजिए यह बकरी से बनी है। बरसों चलेगी अल्लाह की दुआ से। वो सामान दिखाता मोलभाव करता और हर कस्टमर को मुस्कुराहट से रुखसत करता। कहता आप वापस आई दुआ में याद रखें। दोपहर को जोहर की नमाज के लिए मस्जिद जाता। वहां दोस्त मिलते बातें करते कुरान के मायने पर। एक दोस्त बिलाल कहता सोफियान तेरा दिल पाक है अल्लाह तुझे सुकून देगा सोफियान मुस्कुराता आमीन बिलाल तू भी दुआ करना शाम को दुकान बंद करता घर लौटता रास्ते में एक छोटे से रेड़ी वाले से थोड़ी सब्जी खरीदता जहां ताजी प्याज और टमाटर चमकते नफीसा के साथ बैठकर खाना खाता कभी रोटी और दाल कभी चावल और सब्जी जो नफीसा प्यार से बनाती थी उसमें इलायची और लौंग का स्वाद होता खाने के बाद दोनों मिलकर कुरान पढ़ते सूर अल फातिहा दोहराते सिरातल मुस्तकीम हमें सीधा रास्ता दिखा और रात को दुआएं मांगते या अल्लाह घर में सुकून दे परेशानियां दूर कर लेकिन यह सुकून लंबी ना रहा एक दिन घर में एक छोटा सा वाकया बड़ा झगड़ा बन गया अहमद का बेटा बिलाल खेलते हुए नफीसा के पास से गुजरा और गिर गया उसका हाथ चोट लग गई ज़ैनब ने चिल्लाकर कर कहा नफीसा ने मेरा बच्चा गिराया। यह औरत घर की दुश्मन है। नफीसा ने मना किया। भाभी मैंने कुछ नहीं किया। वो खेलते हुए गिरा। मैं तो सिर्फ देख रही थी। लेकिन ज़ैनब ने बात बढ़ा दी। तू झूठी है। हमेशा परेशानी खड़ी करती है। अहमद और करीम आ गए और गुस्सा फूट पड़ा। अहमद ने कहा सोफियान तेरी बीवी घर की दुश्मन है। इसने हमारे बच्चे को चोट पहुंचाई। अब यह घर में नहीं रहेगी। करीम ने ताना मारा। तू इसके पीछे पागल है। परिवार को भूल गया। इसकी वजह से सब बर्बाद हो रहा है। सोफियान ने जवाब दिया, भाई नफीसा ने कुछ नहीं किया। तुम लोग हमेशा उस पर इल्जाम लगाते हो। यह गलत है। अल्लाह देख रहा है। बात इतनी बड़ी कि अहमद ने सोफियान को थप्पड़ मारा। उसका गला दबाया और करीम ने धमकी दी। यह घर तेरा नहीं। अपनी बीवी को लेकर निकल जा यहां से। वरना हम खुद निकाल देंगे। सोफियान का चेहरा लाल हो गया। दिल टूट गया। लेकिन उसने अपने आप को संभाला। बोला मैं अपनी बीवी का साथ दूंगा। तुम लोग गलत हो। उस रात सोफियान अपने कमरे में बैठा। कुरान खोला और सूरह अलराह पढ़ी। अलम नशरा लक सदर फमल उस युसरा इनल युसरा। क्या हमने तेरे सीने को कुशादा नहीं किया? बेशक हर मुश्किल के साथ आसानी है। बेशक हर मुश्किल के साथ आसानी है। वो दिल से रोया लेकिन आयत ने उसके दिल को सुकून दिया। नफीसा के पास बैठकर उसने कहा नफीसा यह घर अब हमारा नहीं रहा। हम तुम्हारे वालिद के शहर चलेंगे। अल्लाह पर भरोसा है वो नई मंजिल दिखाएगा। हम नई जिंदगी शुरू करेंगे। नफीसा की आंखों में आंसू आ गए। उसने हाथ पकड़ा। जो तुम कहो शौहर मैं तुम्हारे साथ हूं। अल्लाह हमें मदद करेगा। अगले दिन सुबह ही वह अपने कपड़े, एक छोटा सा कुरान, थोड़ी सी चीजें जैसे नफीसा का पुराना हार, एक चांदी की जोड़ी और सोफियान का छोटा सा चाकू जो उसके बाप की निशानी था और दिल में ईमान लेकर शहर से निकल गए। सफर लंबा था। दो दिन का, ऊंट पर सवार, रास्ते में धूप की तपिश, थकान और दिल की उदासी उनके साथ थी। पहले दिन वो एक छोटे से गांव में रुके। वहां एक सराय में रुककर नमाज पढ़ी। दुआ मांगी या अल्लाह हमें सलामत रख। नई जिंदगी अता फरमा। नफीसा ने थोड़ा खाना बनाया। सूखी रोटी और पानी और दोनों ने बातें की अपने अतीत के बारे में। कैसे वह पहले मिलते थे। कैसे शादी के दिन नफीसा का चेहरा दुपट्टे के पीछे चमका था। दूसरे दिन रास्ते के मंजर बदलते गए। डिब्बे, पेड़, एक छोटी सी नदी जिसका पानी शीशे साफ और दूर से शहर की झलक। शाम को नफीसा के वालिद के शहर पहुंचे। जहां उनका घर एक छोटी सी गली में था। एक पुरानी हवेली के पास। नफीसा के वालिद का शहर एक शाही और पुराना शहर था। जहां नवाबों की हवेलियां अब भी खड़ी थी। उनकी दीवारें पुरानी कहानियां सुनाती। मस्जिदें कुरान के नूर से रोशन थी। उनके गुंबद आसमान को छूते और बाजार अत्तर, जेवर और रेशमी कपड़ों से महकते थे। लोगों की आवाजें घंटों की घनक और रेड़ी वालों की पुकार बाजार को जिंदा रखती। नफीसा का वालिद अब्दुल रहमान एक पुराने आलिम और उस्ताद थे जो एक छोटे से घर में रहते थे। उनका घर सादा था। एक कमरा जिसमें एक पुराना पलंग, एक लकड़ी का कुरान स्टैंड, एक छोटी रसोई जहां एक लोहे का तवा और पीतल की देगची रखी थी और मस्जिद के करीब एक छोटा आंगन जहां एक नीम का पेड़ हवा में झूमता। अब्दुल रहमान ने सोफियान और नफीसा को देखा। आंखें नम हुई। बेटा आओ यह तुम्हारा घर है। अल्लाह ने तुम्हें यहां भेजा है। वो सब ठीक करेगा। तुम्हारे दुख दूर करेगा। उन्होंने दोनों को गले लगाया, खाना खिलाया और खीर जो उनकी बेटी के आने की खुशी में बनाई थी। रात को बैठकर कुरान की बातें की। सूरह यूसुफ का जिक्र किया कि कैसे मुश्किलें आती हैं लेकिन अल्लाह मदद करता है। अब्दुल रहमान ने कहा सोफियान सब्र करो। अल्लाह के यहां देर है अंधेर नहीं। वो हर मुश्किल के बाद आसानी देता है। सोफियान ने फैसला किया कि वह जल्दी काम ढूंढेगा। मैं तुम दोनों की जिम्मेदारी उठाऊंगा। अल्लाह रिज़्क देगा। उसने अब्दुल रहमान से कहा, पहले दिन वो शहर घूमा, बाजारों की गलियां जहां लोग खरीदारी में मशरूफ थे। दुकानें जहां जेवर चमकते, कपड़े लहराते और अत्थर की खुशबू हवा में घुलती। हर दुकान पर जाकर पूछा, काम है क्या? मैं मेहनती हूं। बर्तनों का तजुर्बा है। लेकिन शहर बड़ा था। हर कोई अपना मकाम बना रहा था। एक दुकानदार ने कहा तजुर्बा चाहिए सोना का काम आता है। दूसरा बोला जगह नहीं कल आना। रोज सुबह निकलता धूप में चलते हुए पैरों में दर्द दोपहर को थका हारा लौटता लेकिन हौसला ना टूटा। एक दिन वो एक पुरानी दुकान के पास रुका। जहां एक बूढ़ा ताजिर चावल बेच रहा था। उसकी दुकान के बाहर एक पुराना झूमर लटक रहा था। सोफियान ने उससे बात की। चाचा काम है। बूढ़ा मुस्कुराया। बेटा यहां सब अपना काम संभालते हैं। लेकिन मस्जिद के पास एक सोना की दुकान है। वहां पूछ। सोफियान ने शुक्रिया कहा। मस्जिद गया नमाज पढ़ी और दुआ की। या अल्लाह मुझे रास्ता दिखा। नफीसा घर संभालती। अपने वालिद के लिए दवाई लाती। खाना बनाती। कभी चावल और दाल, कभी सब्जी और रोटी, कभी एक छोटी सी हांडी में खीर जो अब्दुल रहमान पसंद करते। परेशानियां शुरू हो गई। पहले हफ्ते में पैसे खत्म होने लगे। पुराने शहर से लाए हुए थोड़े से पैसे एक छोटी सी पेटी में रखे हुए खर्च हो गए। एक दिन नफीसा ने कहा, आज चावल नहीं बचे सिर्फ रोटी है। सोफियान ने अपना पुराना कुर्ता बाजार में बेचा। एक बूढ़े ताजिर ने उसे ₹ दिए। उसे थोड़ी सब्जी और दाल खरीदी। लेकिन दिल में दुख था। वो मस्जिद गया। नमाज पढ़ी। अस्र के वक्त कुरान खोला। सूर अशर पढ़ी। इनसरी युसरा और दुआ की या अल्लाह रिज़्का अता फरमा हमें रास्ता दिखा परेशानियां दूर कर दूसरी परेशानी अब्दुल रहमान की तबीयत थी एक रात उन्हें दिल का दर्द हुआ सांस रुकने लगी सोफियान ने उन्हें तबीब के पास ले जाया जहां तबीब ने दवाई दी कहता यह दिल का मसला है आराम चाहिए दवाई रोज खिलाओ और हकीम की जड़ी बूटियों से इलाज करो घर में खाना बनाना मुश्किल हो गया पैसे उधार लेने पड़े एक पड़ोसी ने ₹50 दिए जो एक छोटी सी दुकान का मालिक था। उसे थोड़ी सब्जी लाई लेकिन दोनों के दिल रो रहे थे। एक शाम बाजार में घूमते हुए सोफियान की नजर एक सोने की दुकान पर पड़ी। दुकान चमकती थी। सोने चांदी के जेवर, हार, अंगूठियां सब नूर छोड़ रहे थे। जैसे चांदनी, रात में तारे। मालिक जफर खान एक बूढ़ा कारीगर शहर का मशहूर उस्ताद था। नवाब और अमीर उसके पास आते, जेवर बनवाते। उसका काम इतना पक्का कि लोग कहते जफर का सोना जैसे रूह से बना हो। सोफियान ने हिम्मत की अंदर गया सलाम किया और बोला उस्ताद जी मुझे काम चाहिए। मैं मेहनती हूं जल्दी सीख लूंगा अल्लाह की मदद से। जफर ने उसे गौर से देखा। उसकी आंखों में ईमान का नूर देखा। पूछा। सोना का काम आता है? तजुर्बा है? सोफियान ने सच बोला। नहीं उस्ताद लेकिन मैं सीख लूंगा। मौका दो मैं गलती नहीं करूंगा। जफर ने सोचा उसके सादा चेहरे पर मुस्कुराहट आई और कहा कल सुबह आना काम सीख पैसे कम मिलेंगे। गलती हुई तो निकल जाओगे। सोफियान ने घर जाकर सजदा ए शुक्र अदा किया। या अल्लाह तेरा शुक्र है। तूने रास्ता दिखाया। अगली सुबह सोफियान वक्त पर दुकान पहुंचा। सुबह की धूप में उसका चेहरा चमक रहा था। जफर ने उसे सलाम किया। फिर काम शुरू किया। पहले दिन छोटे काम दुकान साफ करना जहां धूल जमी थी जेवर पॉलिश करना एक मुलायम कपड़े से कस्टमर्स को सामान दिखाना सोफियान ने दिल से किया हाथ हल्के रखे हर जेवर को ऐसे संभाला जैसे कोई अमानत हो जफर देखता कहता सोना नाजुक है बेटा हाथ हल्का रख दिल से काम कर जैसे इबादत दूसरे दिन जफर ने सोना घलाने का काम सिखाया आग पर सोना पिघलाना एक छोटे से बर्तन में उसे छोटी सी शेप देना। सोफियान की उंगलियां जलती दर्द होता लेकिन वो सीखता रहा। उस्ताद यह कैसे करूं? जफर बताता धीरे से आग को कंट्रोल कर। सोना को प्यार से संभाल। रात को घर लौटा। नफीसा से बातें करता। आज मैंने सोना घलाया। उंगली जली लेकिन सीखा। अल्लाह मदद कर रहा है। नफीसा मुस्कुराती। तुम मेहनती हो। अल्लाह तुम्हें कामयाबी देगा। मैं दुआ करूंगी। सोफियान का सोना काम सीखना एक लंबा और मुश्किल सफर था। पहले हफ्ते वो सोना पिघलाने में गलतियां करता। सोना जल जाता या शेप बिगड़ जाती। उस्ताद जफर कहता बेटा हाथ ठंडा रख दिल से काम कर सोना को समझ वो जिंदा चीज है। सोफियान की उंगलियां आग से झुलसती। दर्द से आंखों में आंसू आ जाते। लेकिन वह रुकता नहीं। रात को घर आकर वो नफीसा से कहता आज फिर गलती हुई लेकिन मैं सीख रहा हूं। नफीसा उसकी उंगलियों पर मलहम लगाती सब्र करो मेहनत रंग लाएगी। दूसरे महीने वो सोना तराशना सीखा नक्श बनाना लेकिन हाथ कांपते झेवर बिगड़ जाते। एक बार एक नवाब का आर्डर था। सोफियान ने अंगूठी तराशते वक्त गलती की। पत्थर टूट गया। जफर गुस्सा हुआ। यह नवाब का काम था। नुकसान हो गया। दोबारा कर सैलरी से काटूंगा। सोफियान ने रात भर जागकर दोबारा बनाया। उंगलियां छिलनों से भरी दिल में दुआ या अल्लाह मदद कर। तीसरे महीने वो सोने में नक्श उकेरना सीखा। लेकिन हथियार से हाथ कट गया। खून बहाया। नफीसा ने पट्टी बांधी। तुम्हारे सब्र का फल मिलेगा। चौथे महीने बाद वो जेवर में पत्थर जड़ना सीखा। लेकिन पत्थर गिरते जाफर कहता ध्यान से बेटा यह काम दिल का है। सोफियान दिन रात मेहनत करता सुबह दुकान पहुंचता शाम को थका लौटता लेकिन हर गलती से सीखता। पांचवें महीने वो पूरा जेवर बनाना सीखा। लेकिन पहला हार बिगड़ गया। जफर ने कहा दोबारा बना सीख सब्र कर। सोफियान ने हफ्तों तक अभ्यास किया। उंगलियां सख्त हो गई। दिल मजबूत और आखिर में उसका काम चमका। एक नवाब ने कहा, "यह हार लाजवाब है। सोफियान का स्ट्रगल उसके ईमान और मेहनत का इम्तिहान था जो उसने सब्र से जीता। लेकिन परेशानियां कम ना हुई। पहली बड़ी मुश्किल दुकान पर आई। एक दिन एक नवाब का ऑर्डर था। एक सोने का हार जिसमें लाल पत्थर जड़े हुए थे। सोफियान ने सोना तराशते वक्त गलती की। एक पत्थर गिर गया। टूट गया। जफर गुस्सा हुआ चिल्लाया यह नवाब का आर्डर था नुकसान हो गया तू क्या करेगा अब सैलरी काट लूंगा सोफियान ने माफी मांगी उस्ताद गलती हो गई मैं संभाल लूंगा दोबारा नहीं होगी रात को मस्जिद में रोया कुरान खोला सूर अल बकरा पढ़ी इन्नाल्लाह व इन्ना इलाही राजून हम अल्लाह के हैं और उसी की तरफ लौटे और सोचा गलती से सीखता हूं अल्लाह मुझे माफ करे सब्र दे तीसरी परेशानी सेहत की थी। सोफियान को बुखार चढ़ गया। काम के बोझ और थकान ने उसे बीमार किया। तीन दिन बिस्तर पर पड़ा। नफीसा ने दवाई दी। सूप बनाया। शौहर आराम करो। अल्लाह शिफा देगा। लेकिन दुकान छूट गई। पैसे कम हुए। फिर एक रात घर में चोरी हो गई। दरवाजा तोड़कर चोर आए। नफीसा के थोड़े से जेवर जो उसकी मां की निशानी थे। एक छोटा सा हार और एक जोड़ी बाली ले गए। सोफियान ने शहर के चौकीदार को बताया शिकायत लिखवाई लेकिन कोई मदद ना मिली वो दिल से टूट गया मस्जिद गया सूर यूसुफ पढ़ी हजरत युसुफ अलैहिस्सलाम के सब्र को याद किया जैसे उन्हें जेल हुई भाइयों ने धोखा दिया लेकिन अल्लाह ने मदद की और दुआ की या अल्लाह मुझे सब्र दे यह इम्तिहान है तू मदद कर जफर जो अब सोफियान को अपना बेटा समझता था उसे एडवांस काम सिखाया डिजाइन बनाना, नवाबी जेवर तराशना, सोने में नक्श उकेरना। सोफियान रोज मेहनत करता, सुबह से शाम तक दुकान पर रहता, सीखता। एक दिन एक नवाब आया कहता, सोफियान एक हार बनाओ मेरी बेगम के लिए जिसमें मोती और नीलम हो। सोफियान ने दिल से काम किया। एक हार बनाया जो चांदनी रात में तारों सा चमका। नवाब खुश हुआ। यह काम लाजवाब है। तेरा हाथ में जादू है। एक साल में सोफियान कारीगर बन गया। कस्टमर्स उसे पसंद करने लगे। कहते सोफियान का काम लाजवाब है। इसके जेवर में नूर है जैसे ईमान। एक साल बाद सोफियान की जिंदगी थोड़ी बेहतर होने लगी। वो अपना छोटा घर लेने की सोच रहा था। एक छोटी सी गली में एक मकान देखा था। जहां एक छोटा आंगन, दो कमरे और एक छोटी सी मस्जिद के पास जगह थी। जफर से बात की पार्टनरशिप की। उस्ताद आपके साथ मिलकर दुकान खोलूं। जफर मुस्कुराया। बेटा तू तैयार है। तेरा काम नूरानी है। लेकिन तभी पुराने शहर से अहमद और करीम आए। उन्हें खबर मिली कि सोफियान अच्छा कमा रहा है। वो घर पहुंचे चेहरे पर झूठी मुस्कान कहते भाई हमसे गलती हुई। माफ कर दो। वापस आजा परिवार एक हो। लेकिन असल में उनकी दुकान में नुकसान हुआ था। एक बड़ा ताजिर ने पैसा नहीं दिया और वह पैसे मांगने आए थे। सोफियान ने उन्हें खाना खिलाया और खीर जो अब्दुल रहमान ने मांगी थी और जितने पैसे बन सके दिए एक छोटी सी पेटी में रखे हुए पैसे निकालकर लेकिन वापस ना गया। बात बढ़ी। अहमद ने नफीसा को ताना मारा। यह औरत अब भी तुझे बर्बाद कर रही है। घर में सुकून नहीं इसकी वजह से। सोफियान का गुस्सा फूट पड़ा। भाई मेरी बीवी को बीच में मत लाओ। तुम लोगों ने हमें घर से निकाला। अब पैसे के लिए आए हो? जाओ यहां से। झगड़ा हुआ। करीम ने धमकी दी। तू भूल जाएगा हमें। हम तुझे बर्बाद कर देंगे। सोफियान ने उन्हें घर से निकाला। दरवाजा बंद किया। यह वाकया उसके दिल को गहरी छोट दिया। वो रात भर नमाज पढ़ता रहा। सूर अल फातिहा दोहराई। इदन सिरातल मुस्तकीम। हमें सीधा रास्ता दिखा और दुआ की या अल्लाह मुझे माफ करने की तौफीक दे। मेरे दिल को सुकून दे। भाइयों को हिदायत दे। वक्त गुजरा सोफियान ने जफर के साथ मिलकर अपनी दुकान खोली। ईमान के जेवर। दुकान एक छोटी सी गली में थी। लेकिन उसकी चमक शहर में फैल गई। वो शहर का मशहूर कारीगर बना। नवाब, अमीर और आम लोग उसके पास जेवर बनवाने आते। एक नवाब ने कहा, सोफियान एक हार बना जिसमें हीरे जड़े हो। मेरी हवेली के जश्न के लिए। सोफियान ने दिन रात काम किया। एक हार बनाया जो चांदनी रात में तारों सा चमका। नवाब ने उसे गले लगाया। तेरा काम शहर में नाम करेगा। सोफियान की मेहनत रंग लाई। वो शहर का बड़ा आदमी बन गया। नवाब उसके दोस्त बने। दुकान बढ़ी। कारीगर उसके नीचे काम करने लगे। वो अपना बड़ा मकान खरीदा। जहां एक बाग था और एक छोटी सी मस्जिद। वो मेहनत से अमीर हुआ लेकिन ईमान पर कायम रहा। कुछ सालों बाद अहमद और करीम सोफियान के पास आए। उनकी दुकान को आग लग गई। सब बर्बाद हो गया। वो शहर छोड़कर आए। कहते भाई हमें माफ कर हमें काम दे। हमारी दुकान जल गई। सोफियान ने उन्हें माफ किया। आओ मेरे दुकान पर काम करो। अल्लाह सब ठीक करेगा। वो उन्हें काम पर रख लिया। सोना काम सिखाया और परिवार फिर एक हो गया। हर सुबह वो मस्जिद जाता, नमाज पढ़ता और दुकान पर काम करता। नफीसा घर संभालती, खाना बनाती। कभी बिरयानी जिसमें केसर का रंग होता, कभी खीर जिसमें बादाम डाले होते और अपने वालिद की सेवा करती। जफर उनका दोस्त और उस्ताद बन गया। अक्सर घर आता चाय पीता और कहता सोफियान तेरा काम अब शहर की शान है। सोफियान मुस्कुराता। यह सब अल्लाह की रहमत है उस्ताद। यह कहानी सब्र, ईमान और मेहनत की मिसाल है। सोफियान का सफर बताता है कि मुश्किलें आती हैं। लेकिन जो अल्लाह पर तवकक्कल करे उसका रास्ता रोशन होता है। हर रोज कुरान पढ़ो, नमाज कायम करो और दुआएं मांगो। यही जिंदगी का असल जेवर है