कहानी यूसुफ की

यह कहानी है यूसुफ की जो अपने बीमार बाप के लिए लोहार की भट्टी में मेहनत करता है मगर परेशानियां और लोगों की साजिशें उसका रास्ता रोकती हैं और आयशा जिसकी जिंदगी भी मुश्किलों से भरी है दोनों मिलकर सच्चाई और नेकी से इन साजिशों का मुकाबला करते हैं क्या यूसुफ और आयशा इन मुश्किलों से जीत पाएंगे यह जानने के लिए देखिए पूरी कहानी लाहौर के एक हलचल भरे मोहल्ले में जहां सुबह की अजान गलियों में गूंजती थी और बाजार की रौनक दिन भर बनी रहती थी एक मेहनती नौजवान रहता था जिसका नाम था यूसुफ यूसुफ का चेहरा सादा था मगर उसकी आंखों में एक चमक थी जैसे कोई बड़ा ख्वाब पल रहा हो उसका बाप इब्राहिम कमर की बीमारी से बिस्तर पर था और यूसुफ ने जवान उम्र में ही घर की जिम्मेदारी उठा ली थी वो दिन में एक लोहार की दुकान पर काम करता और रात को मस्जिद में कुरान की तकलीम लेता उसका ख्वाब था कि वह अपनी मेहनत और इल्म से अपने बाप का नाम रोशन करें और उनकी हर तकलीफ दूर करें यूसुफ की जिंदगी मेहनत के बगैर अधूरी थी वो मोहल्ले के एक लोहार उस्ताद रशीद की दुकान पर काम करता था सुबह फज्र की नमाज पढ़ने के बाद वह दुकान पर पहुंच जाता वहां वो भट्टी जलाता लोहा तपाता और हथौड़े से आकार देता उसका पसीना सूरज ढलने तक चमकता रहता उस्ताद रशीद उसकी लगन से खुश थे वो कहते यूसुफ तू मेरे लिए बेटे जैसा है तेरी मेहनत तेरा नसीब चमकाएगी यूसुफ बस मुस्कुराता और काम में जुट जाता यूसुफ ने लोहे का हर काम सीखा वो तलवारें हथियार और खेती के औजार बनाता एक दिन एक बड़ा सौदागर मियां ताहिर दुकान पर आया और एक खास तलवार मांगी जिसे बनाना मुश्किल था यूसुफ ने रात-रात जागकर तलवार बनाई उसने लोहे को इतनी बारीकी से तराशा कि तलवार चमक उठी मियां ताहिर ने तलवार देखकर कहा "यह काम तो किसी उस्ताद का है " उस्ताद रशीद ने मुस्कुरा कर कहा "यह मेरे शागिर्द यूसुफ का काम है " यूसुफ की तारीफ सुनकर उसका हौसला और बढ़ गया उसने मेहनत में कोई कसर ना छोड़ी वो भट्टी की आग को समझता हथौड़े की चाल को सही करता और हर औजार को परखता एक बार एक किसान ने जल्दी में एक हल मांगा यूसुफ ने दिन रात काम करके हल तैयार किया किसान ने कहा तेरे जैसा मेहनती लड़का मैंने पहले नहीं देखा यूसुफ ने शुक्रिया कहा और काम में लग गया उसकी मेहनत ने बाजार में उसका नाम फैलाना शुरू कर दिया यूसुफ ने ना सिर्फ औजार बनाए बल्कि खरीदारों की जरूरतों को समझा एक बार एक खरीदार ने शिकायत की कि उसका हल जल्दी टूट गया यूसुफ ने हल देखा और पाया कि लोहा कमजोर था उसने नया हल बनाया और खरीदार को मुफ्त में दे दिया खरीदार ने कहा यूसुफ तेरा दिल सोने जैसा है यूसुफ ने कहा बस इंसाफ और मेहनत मेरा उसूल है उसकी यह बात बाजार में फैल गई और लोग उसकी दुकान पर ज्यादा आने लगे रात को जब बाजार की दुकानें बंद हो जाती यूसुफ मस्जिद जाता वहां मौलवी साहब जो एक बुजुर्ग और इल्म वाले शख्स थे उसे कुरान की तालीम देते यूसुफ ने कुरान की आयतें याद की और अरबी फारसी की किताबें पढ़ी मौलवी साहब कहते बेटा इल्म और इबादत इंसान को अल्लाह के करीब ले जाती है यूसुफ ने सूर यासीन और सूर रहमान को अपने दिल का सुकून बनाया वो हर रात दुआ मांगता ऐ मेरे रब मुझे हलाल रास्ते से इज्जत और कामयाबी दे और मेरे बाप को शिफा बखश सूर बकरा की आयत जो लोग सब्र और हक के साथ मेहनत करते हैं अल्लाह उनकी मदद करता है उसका हौसला बन गई यूसुफ को बाजार में एक बद् मौका मिला जब हाजी यूनुस एक मशहूर ताजिर ने अपने हिसाब किताब के लिए एक मेहनती और इल्म वाले नौजवान की तलाश की यूसुफ ने इसे अपनी मंजिल समझा उसने रात-रात जागकर हिसाब किताब का इल्म सीखा मौलवी साहब ने उसे अरबी और फारसी की तिजारती किताबें पढ़ाई यूसुफ ने पुरानी हिसाब की किताबें मांगी और उन्हें रात दिन पढ़ा वो बाजार में छोटे ताजिरों के हिसाब देखता और प्रैक्टिस करता एक दिन उस्ताद रशीद की दुकान का हिसाब गलत हो गया यूसुफ ने रात भर जागकर हिसाब ठीक किया उसने हर पैसे का हिसाब लिखा और गलतियां सुधारी उस्ताद रशीद ने कहा यूसुफ तू हिसाब में भी उस्ताद बन गया है यूसुफ ने मुस्कुरा कर कहा उस्ताद यह सब आपकी दुआ और मेरी मेहनत का नतीजा है उसने हिसाब की बारीकियां सीखी जैसे माल की कीमत मुनाफा और उधारी का हिसाब वो हर छोटी गलती को सुधारता और सीखता यूसुफ ने बाजार के छोटे ताजिरों की मदद शुरू की एक दुकानदार मियां सलीम का हिसाब उलझ गया था यूसुफ ने उसका हिसाब ठीक किया और मुनाफा बढ़ाने की सलाह दी मियां सलीम ने कहा यूसुफ तू तो बाजार का सितारा है यूसुफ ने सिर्फ मुस्कुरा कर कहा यह सब अल्लाह की मेहरबानी है उसकी मेहनत और इल्म ने बाजार में उसकी इज्जत बढ़ा दी वो हर दिन कुछ नया सीखता मौलवी साहब ने उसे एक हदीस सुनाई जो शख्स हलाल कमाई के लिए मेहनत करता है वह अल्लाह का दोस्त होता है यूसुफ ने इस हदीस को दिल में उतारा वो बाजार में हिसाब की किताबें देखता ताजिरों से बात करता और हर दिन अपनी मेहनत को और पक्का करता एक बार एक ताजिर मियां हामिद का माल बिक नहीं रहा था यूसुफ ने उसका हिसाब देखा और सलाह दी कि वह माल की कीमत कम करे और नए खरीदारों को अपनी तरफ खींचे मियां हामिद का मुनाफा बढ़ गया उसने यूसुफ से कहा तू मेरे लिए फरिश्ता है यूसुफ ने कहा मियां साहब यह मेहनत और अल्लाह की रहमत है यूसुफ ने हिसाब की नईनई तरकीबें सीखी वो बाजार में माल की कीमतों का हिसाब रखता ताज़िरों की उधारी का रिकॉर्ड बनाता और हर हिसाब को बार-बार चेक करता उसने एक नया तरीका निकाला जिसमें वह हर ताज़िर के माल का हिसाब अलग-अलग रजिस्टर में रखता इससे हिसाब साफ और आसान हो गया बाजार के लोग कहते यूसुफ का हिसाब कभी गलत नहीं होता उसकी यह मेहनत बाजार में मिसाल बन गई एक दिन जब सूरज ढल रहा था और बाजार की हलचल कम हो रही थी एक लड़की दुकान पर आई उसका नाम था आयशा आयशा का चेहरा नूरानी था और उसकी आंखों में एक शराफत थी जो हर किसी का दिल जीत लेती वो अपने छोटे भाई अली की टूटी तलवार ठीक करवाने आई थी यूसुफ ने बड़े अदब से तलवार ली उसे भट्टी में तपाया हथौड़े से ठीक किया और चमका कर लौटा दिया आयशा ने उसकी मेहनत और नरम मिजाजी को देखा तो उसका दिल यूसुफ पर आ गया उसने कहा शुक्रिया भाई तुमने इतनी जल्दी और अच्छे से काम कर दिया यूसुफ ने मुस्कुरा कर सर झुका लिया आयशा एक नेक और पढ़ी लिखी लड़की थी वो मस्जिद में छोटे बच्चों को कुरान पढ़ाती थी और अपने खानदान की शान थी उसके वालिद हाजी साहब मोहल्ले के रसूखदार थे वो एक छोटी सी कपड़े की दुकान चलाते थे मगर उनका कारोबार मंदा चल रहा था आयशा की मां गुजर चुकी थी और वह अपने छोटे भाई अली की परवरिश करती थी अली एक चंचल लड़का था जो मस्जिद में पढ़ता और बाजार में दोस्तों के साथ खेलता आयशा ने घर जाकर अपने वालिद से यूसुफ की तारीफ की उसने कहा वालिद आज एक लोहार के लड़के ने अली की तलवार ठीक की उसकी मेहनत और अदब देखकर दिल खुश हो गया हाजी साहब ने मुस्कुरा कर कहा बेटी मेहनत करने वाले लोग अल्लाह के करीब होते हैं मगर हमारा खानदान बड़ा है यूसुफ मेहनती है लेकिन उसकी माली हालत हमारे बराबर नहीं आयशा ने चुपके से सर झुका लिया उसके दिल में यूसुफ के लिए इज्जत और मोहब्बत जाग चुकी थी मगर वो अपने जज्बात को छुपा लेती थी यूसुफ को भी आयशा अच्छी लगी उसकी सादगी और नेकी ने यूसुफ के दिल को छू लिया वो मस्जिद में कभी-कभी आयशा को बच्चों को पढ़ाते देखता और सोचता ऐसी नेक लड़की को अल्लाह ने खास बनाया है मगर यूसुफ ने अपने दिल को समझाया मुझे पहले अपने बाप का सहारा बनना है इश्क का वक्त अभी नहीं वो और ज्यादा मेहनत करने लगा उसने अपनी कमाई से अपने बाप की दवाइयां खरीदी और घर का खर्चा चलाया यूसुफ की मेहनत को देखकर बाजार में कुछ लोग जलने लगे उनमें से एक था गुलाम जो उस्ताद रशीद की दुकान पर यूसुफ के साथ काम करता था गुलाम आलसी था और यूसुफ की मेहनत का मजाक उड़ाता वह कहता यूसुफ तू कितना भी हथौड़ा मार ले तेरा नसीब लोहार का ही रहेगा यूसुफ चुप रहता और अपने काम में डूबा रहता गुलाम का दिल जलन से भरा था उसे लगता था कि उस्ताद रशीद यूसुफ को ज्यादा तवज्जो देते हैं एक दिन गुलाम ने यूसुफ को चोट पहुंचाने की ठान ली उसने बाजार में अफवाह फैलाई कि यूसुफ दुकान से पैसे चुराता है यह बात उस्ताद रशीद तक पहुंची उन्होंने यूसुफ को बुलाया और पूछा बेटा क्या यह सच है यूसुफ की आंखें नम हो गई उसने कहा उस्ताद मैं अल्लाह को हाजिर नाजिर जानकर कहता हूं कि मैंने कभी आपका भरोसा नहीं तोड़ा मेरे हिसाब की किताबें चेक कर लीजिए उस्ताद रशीद ने हिसाब देखा और पाया कि यूसुफ का हर हिसाब सही है उन्होंने गुलाम को सख्ती से डांटा और दुकान से निकाल दिया गुलाम ने यूसुफ से बदला लेने की कसम खाई गुलाम अब बाजार में एक छोटे ताजिर मियां नासिर के यहां काम करने लगा मियां नासिर एक लालची शख्स था जो बाजार में अपनी धाक जमाना चाहता था गुलाम ने मियां नासिर को यूसुफ के खिलाफ भड़काया और कहा यूसुफ अब हाजी यूनुस का मुंशी बनने की तैयारी कर रहा है अगर वह कामयाब हो गया तो आपकी इज्जत कम हो जाएगी मियां नासिर ने गुलाम को हामी भरी और एक नया प्लान बनाया मियां नासिर ने अपने आदमियों को यूसुफ की दुकान के पास भेजा ताकि वह खरीदारों को डराकर भगा दें एक दिन एक खरीदार ने यूसुफ की बनाई तलवार खरीदने से मना कर दिया और कहा मियां नासिर ने कहा है कि तुम्हारा माल अच्छा नहीं यूसुफ को दुख हुआ मगर उसने सब्र रखा उसने उस्ताद रशीद से मशवरा किया उस्ताद रशीद ने कहा बेटा सच्चाई हमेशा जीतती है तू अपनी मेहनत पर भरोसा रख यूसुफ ने और मेहनत शुरू की उसने खरीदार के लिए औजारों की क्वालिटी और बढ़ाई ताकि कोई शिकायत ना कर सके मियां नासिर ने हार नहीं मानी उसने एक बाहरी सौदागर मियां फारूक को बाजार में बुलाया मियां फारूक एक चालाक शख्स था जो बाजार में सस्ता माल लाकर छोटे ताजीरों को नुकसान पहुंचाता था मियां नासिर ने मियां फारूक से कहा कि तुम बाहर से सस्ते औज़ लाकर यहां बेचो इससे यूसुफ की कमाई को नुकसान पहुंचेगा मियां फारूक ने हामी भरी और एक साजिश रची मियां फारूक ने बाजार में सस्ते औजार बेचने शुरू किए जो यूसुफ की दुकान से सस्ते थे उसने अफवाह फैलाई कि यूसुफ का माल महंगा और कमजोर है यूसुफ के खरीदार कम होने लगे यूसुफ ने सब्र रखा और अपनी मेहनत बढ़ाई उसने औजारों की क्वालिटी और बेहतर की और खरीदार को समझाया कि उसका माल मजबूत और टिकाऊ है धीरे-धीरे खरीदार वापस आने लगे एक रात यूसुफ के बाप इब्राहिम की तबीयत बहुत बिगड़ गई वो दर्द से करा रहे थे हकीम ने कहा कि उनकी बीमारी का इलाज महंगी जड़ी बूटियों से ही हो सकता है यूसुफ ने दिन रात दुकान पर काम किया मगर पैसे कम पड़ रहे थे वो रात को मस्जिद में जाकर दुआ मांगता ऐ अल्लाह मेरे बाप को शिफा दे मुझे हिम्मत दे कि मैं उनकी हर तकलीफ दूर कर सकूं उसकी मेहनत देखकर उस्ताद रशीद ने उसे कुछ पैसे उधार दिए मगर वह भी नाकाफी थे यूसुफ ने अपनी मेहनत बढ़ा दी वो सुबह जल्दी उठता दुकान पर काम करता और रात को हिसाब किताब सीखता उसने बाजार में छोटे-मोटे काम भी शुरू किए जैसे दूसरी दुकानों के औजार ठीक करना उसकी मेहनत ने कुछ पैसे जोड़े मगर इब्राहिम की दवाइयों का खर्चा बढ़ता जा रहा था यूसुफ ने कभी हिम्मत ना हारी वो मस्जिद में सूर शिरा पढ़ता बेशक हर मुश्किल के साथ आसानी है और सब्र करता आयशा को मोहल्ले की औरतों से इब्राहिम की तबीयत की खबर मिली उसका दिल पिघल गया आयशा की अपनी जिंदगी भी आसान नहीं थी उसके वालिद की दुकान में मुनाफा कम हो रहा था और अली की पढ़ाई का खर्चा बढ़ रहा था फिर भी आयशा ने अपनी मां की दी हुई चांदी की पायल जो उसकी सबसे कीमती चीज थी बेच दी उसने चुपके से यूसुफ के घर पैसे भिजवा दिए पैसे एक पुराने लिफाफे में थे जिस पर कुछ नहीं लिखा था यूसुफ को जब यह पैसे मिले तो वह हैरान रह गया उसने मोहल्ले में पूछताछ की तो उसे पता चला कि यह आयशा की तरफ से हैं यूसुफ का दिल भारी हो गया वो आयशा के घर गया और बड़े अदब से बोला आयशा भी यह पैसे मैं नहीं रख सकता मैं आपका कर्ज जरूर चुकाऊंगा आयशा ने मुस्कुरा कर कहा यूसुफ भाई यह कर्ज नहीं मेरी तरफ से तुम्हारे बाप के लिए दुआ है अल्लाह ने मुझे यह मौका दिया कि मैं किसी की मदद कर सकूं यूसुफ की आंखें नम हो गई उसने आयशा की नेकी को दिल से कबूल किया और और ज्यादा मेहनत करने का इरादा किया आयशा की यह कुर्बानी उसके लिए आसान नहीं थी उसने अपने वालिद से पायल बेचने की बात छुपाई क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि हाजी साहब परेशान हो उसने अब सिलाई का काम भी शुरू किया वो रात-रात जागकर कपड़े सिलती और सुबह मस्जिद के बच्चों को पढ़ाती आयशा की मेहनत देखकर बानोबी ने कहा आयशा तेरा दिल सोने जैसा है तेरी नेकी तुझे जन्नत ले जाएगी आयशा ने अपनी मेहनत को नई मंजिल दी उसने मोहल्ले की औरतों को इकट्ठा किया और एक छोटा सा सिलाई मरकज शुरू किया उसने अपनी सिलाई की मशीन के साथ काम शुरू किया और औरतों को सिलाई सिखाई मोहल्ले की औरतें जैसे फातिमा भी और ज़ैनब भी आयशा के साथ जुड़ गई आयशा ने उन्हें कपट सिलने की बारीकियां सिखाई जैसे करहाई और जरी का काम आयशा का सिलाई मरकज जल्दी ही मशहूर हो गया बाजार के ताज़िर उनके बनाए कपड़े और दुपट्टे खरीदने लगे आयशा ने अपनी कमाई का एक हिस्सा यतीम खाने के लिए रखा उसने मोहल्ले की औरतों को हौसला दिया हमारी मेहनत हमारी इज्जत है अल्लाह हमारी मदद करेगा फातिमा बी ने कहा आयशा तूने हमें नई जिंदगी दी आयशा ने मुस्कुरा कर कहा यह सब अल्लाह की रहमत है आयशा ने अपने सिलाई मरकज को और बढ़ाया उसने बाजार में एक छोटा सा स्टॉल लिया जहां वो औरतों के बनाए कपड़े बेच दी उसने बच्चों के कपड़े दुपट्टे और कुर्ते बनाए जो बाजार में खूब पसंद किए गए आयशा की मेहनत ने मोहल्ले की औरतों का हौसला बनाया बानोबी ने कहा आयशा तू मोहल्ले की रोशनी है आयशा की जिंदगी में कई मुश्किलें थी हाजी साहब की दुकान अब घाटे में चल रही थी बाजार में नए ताजिर आ गए थे जो सस्ते कब्त ददड़े बेचते थे हाजी साहब पर उधारी का बोझ बढ़ रहा था आयशा ने अपने वालिद का हौसला बढ़ाया उसने कहा वालिद अल्लाह पर भरोसा रखिए सब ठीक हो जाएगा उसने अपने सिलाई के काम से जो पैसे कमाए उससे अली की पढ़ाई का खर्चा उठाया अली एक होनहार लड़ियाच का था मगर उसकी चंचलता आयशा के लिए सिर दर्द बन जाती वो बाजार में दोस्तों के साथ खेलने निकल जाता और देर से घर लौटता एक दिन अली ने बाजार में एक ठेले वाले से झगड़ा कर लिया आयशा को जब यह बात पता चली तो वो अली को घर ले आई और समझाया अली गुस्सा और झगड़ा गुनाह की तरफ ले जाता है अल्लाह ने हमें सब्र सिखाया है अली ने अपनी दीदी से माफी मांगी और वादा किया कि वो पढ़ाई पर ध्यान देगा आयशा ने अली को मस्जिद में मौलवी साहब के पास पढ़ने भेजा मौलवी साहब ने अली की तारीफ की और कहा बेटा तू अपनी दीदी की इज्जत रख वो तेरे लिए दिन रात मेहनत करती है अली ने मौलवी साहब की बात दिल से ली और पढ़ाई में जुट गया आयशा को अपने भाई की तरक्की देखकर सुकून मिला आयशा की जिंदगी में और मुश्किलें आई हाजी साहब की दुकान पर एक पुराना खरीदार मियां रफीक ने उधारी का पैसा मांगा हाजी साहब के पास पैसे नहीं थे मियां रफीक ने बाजार में हाजी साहब की बेइज्जती की और कहा हाजी साहब अगर तुम पैसे नहीं दे सकते तो दुकान बंद कर दो हाजी साहब का दिल टूट गया आयशा ने अपने वालिद को देखा और कहा बाबा अल्लाह पर भरोसा रखिए मैं आपका साथ नहीं छोड़ दूंगी उसने अपनी सिलाई से कमाए पैसे हाजी साहब को दिए ताकि वो मियां रफीक का कुछ कर्ज चुका सके हाजी साहब ने कहा बेटी तू मेरी शान है मगर मुझे शर्मिंदगीगी हो रही है कि तुझे इतनी मेहनत करनी पड़ रही है आयशा ने मुस्कुरा कर कहा मेहनत में इज्जत है अल्लाह हमारी मदद करेगा आयशा ने अपने सिलाई के काम को और बढ़ाया वो मोहल्ले की औरतों के लिए कपड़े सिलती और बाजार में भेज दी उसकी मेहनत देखकर बानोबी ने कहा आयशा तू अल्लाह की नेक बेटी है तेरी मेहनत रंग लाएगी आयशा ने बानोबी की दुआ ली और काम में जुट गई यूसुफ की मेहनत की खबर बाजार में फैल गई मियां नासिर और गुलाम का जलन और बढ़ गया मियां नासिर ने गुलाम को बुलाया और कहा यूसुफ को हाजी यूनुस का मुंशी बनने से रोकना होगा वो मेरे रास्ते का कांटा है गुलाम ने एक नया प्लान बनाया उसने बाजार में अफवाह फैलाई कि यूसुफ हाजी यूनुस के हिसाब में गड़बड़ी करने की सोच रहा है यह अफवाह हाजी यूनुस तक पहुंची उन्होंने यूसुफ को बुलाया और पूछा बेटा क्या यह सच है यूसुफ ने बड़े अदब से कहा हाजी साहब मैं अल्लाह को हाजिर नाजिर जानकर कहता हूं कि मैंने कभी गलत इरादा नहीं किया मेरे हिसाब की किताबें चेक कर लीजिए हाजी यूनुस ने यूसुफ की किताबें देखी और पाया कि हर हिसाब सही है उन्होंने गुलाम को बुलाया और सख्ती से पूछा तूने यह अफवाह क्यों फैलाई गुलाम घबरा गया और सच बोल दिया कि मियां नासिर ने उसे ऐसा करने को कहा हाजी यूनुस ने मियां नासिर को बाजार से निकाल दिया और गुलाम को माफी मांगने का हुक्म दिया यूसुफ ने बड़े दिल से कहा हाजी साहब मैं गुलाम से कोई शिकवा नहीं रखता अल्लाह उसे हिदायत दे हाजी यूनुस ने युसुफ की नेकी की तारीफ की और उसे इम्तिहान के लिए बुलाया यूसुफ ने अपनी मेहनत को और बढ़ाया वो रात-रात जागकर हिसाब की किताबें पढ़ता मौलवी साहब ने उसे तिजारत की नैतिकता सिखाई एक आयत जो लोग सब्र करते हैं और अल्लाह पर भरोसा रखते हैं अल्लाह उनकी मदद करता है यूसुफ के दिल में बस गई वो मस्जिद में मौलवी साहब से तिजारत की बातें करता और सीखता कि सच्चाई और इंसाफ तिजारत की बुनियाद है यूसुफ ने बाजार के छोटे ताजिरों के हिसाब देखे और प्रैक्टिस की एक ताजिर मियां हामिद का हिसाब उलझ गया था यूसुफ ने उसका हिसाब ठीक किया और मुनाफा बढ़ाने की सलाह दी मियां हामिद ने कहा यूसुफ तू तो बाजार का मोती है यूसुफ ने कहा यह सब मेहनत और अल्लाह की रहमत है उसने हर दिन कुछ नया सीखा और अपनी मेहनत को और पक्का किया उसने हिसाब की नईनई तरकीबें सीखी वो बाजार में माल की कीमतों का हिसाब रखता व्यापारियों की उधारी का रिकॉर्ड बनाता और हर हिसाब को बार-बार चेक करता उसकी मेहनत ने उसे बाजार में एक नई पहचान दी लोग कहते यूसुफ का हिसाब कभी गलत नहीं होता इम्तिहान का दिन आया बाजार के कई नौजवान वहां जमा हुए गुलाम भी था जो अब मियां नासिर के बिना अकेला था उसने यूसुफ को देखकर ताना मारा आज तेरा नसीब आजमाया जाएगा यूसुफ ने चुप रहकर सिर्फ अपने काम पर ध्यान दिया इम्तिहान में हिसाब किताब ताजिर की समझ और नेक चाल चलन की बातें पूछी गई यूसुफ ने अपने इल्म और मेहनत के दम पर हर सवाल का जवाब दिया उसकी सच्चाई और मेहनत ने हाजी यूनुस का दिल जीत लिया हाजी यूनुस ने यूसुफ को अपने बाजार का मुंशी बना लिया यूसुफ की मेहनत ने उसे इज्जत और कामयाबी दी उसने अपने बाप का इलाज करवाया और इब्राहिम की सेहत में सुधार होने लगा उसने अपने घर को और बेहतर बनाया और मोहल्ले के लोगों की तारीफें सुनी लेकिन उसका दिल अभी भी आयशा के लिए धड़कता था वो जानता था कि आयशा की नेकी और दुआ ने उसे इस मंजिल तक पहुंचाया है यूसुफ ने हाजी यूनुस के बाजार में हिसाब किताब को और बेहतर किया उसने हर ताजिर का हिसाब साफ रखा और बाजार में इंसाफ की मिसाल कायम की एक बार दो ताजिरों में माल की कीमत को लेकर झगड़ा हो गया यूसुफ ने दोनों के हिसाब देखे और सच्चाई सामने लाई अली की शरारतें कम नहीं हो रही थी एक दिन वो बाजार में गलत दोस्तों के साथ पकड़ा गया आयशा को बहुत दुख हुआ उसने अली को समझाया अली अल्लाह हर कदम देख रहा है गलत रास्ते से कुछ नहीं मिलता अली ने अपनी दीदी से माफी मांगी और वादा किया कि वह पढ़ाई पर ध्यान देगा अली ने यूसुफ से हिसाब किताब सीखना शुरू किया यूसुफ ने उसे बाजार में ले जाकर ताजिर की बारीकियां सिखाई एक दिन अली ने यूसुफ के लिए एक छोटा सा हिसाब ठीक किया यूसुफ ने कहा "अली तू एक दिन बाजार का बड़ा ताजिर बनेगा " अली ने मुस्कुरा कर कहा भाई यह सब आपकी और दीदी की मेहनत की बरकत है यूसुफ की कामयाबी अब मोहल्ले में मशहूर हो चुकी थी उसने अपने बाप का इलाज करवाया और इब्राहिम अब धीरे-धीरे ठीक हो रहे थे यूसुफ ने मोहल्ले के गरीबों की मदद शुरू की वो मस्जिद में बच्चों के लिए किताबें लाया और मौलवी साहब की मदद से एक छोटा सा मकतब शुरू किया एक दिन यूसुफ ने मौलवी साहब से कहा "मैं मोहल्ले के यतीम बच्चों के लिए कुछ करना चाहता हूं " मौलवी साहब ने कहा बेटा यह अल्लाह का नेक काम है तू आयशा से बात कर वो बच्चों को पढ़ाती है तुम दोनों मिलकर कुछ बड़ा कर सकते हो यूसुफ ने आयशा से बात की आयशा ने खुशी-खुशी हामी भरी यूसुफ और आयशा ने मिलकर मस्जिद के पास एक छोटा सा यतीम खाना शुरू किया यूसुफ ने अपनी कमाई का एक हिस्सा यतीम खाने के लिए रखा और आयशा ने बच्चों को कुरान के साथ-साथ सिलाई और बुनाई जैसे हुनर सिखाने शुरू किए यतीम खाने में 10 बच्चे थे जिनमें हामिद एक चुपचाप लड़का और फातिमा एक मेहनती लड़की शामिल थे यूसुफ ने हामिद को हिसाब किताब सिखाया और आयशा ने फातिमा को सिलाई सिखाई यतीम खाना चलाना आसान नहीं था मियां फारूक की साजिश ने यतीम खाने की कमाई को नुकसान पहुंचाया यूसुफ और आयशा ने बच्चों को और मेहनत करने की हौसला अफजाई की हामिद ने यूसुफ से कहा भाई मैं एक दिन आपके जैसा बनना चाहता हूं यूसुफ ने मुस्कुरा कर कहा बेटा मेहनत और अल्लाह पर भरोसा रख तू मुझसे बेहतर बनेगा आयशा ने बच्चों को कुरान की आयतें पढ़ाई और कहानियां सुनाई एक आयत जो लोग अल्लाह के रास्ते में खर्च करते हैं उनकी दौलत कई गुना बढ़ जाती है उसका हौसला बन गई आयशा ने अपनी सिलाई से कमाए पैसे का एक हिस्सा यतीम खाने के लिए दिया उसकी नेकी देखकर बानोबी ने कहा आयशा तेरा दिल सोने जैसा है यूसुफ और आयशा का यतीम खाना अब मोहल्ले में मशहूर हो चुका था दोनों की मेहनत और नेकी ने लोगों का दिल जीत लिया यूसुफ का दिल आयशा के लिए और धड़कने लगा वो जानता था कि आयशा की नेकी और दुआ ने उसे इस मंजिल तक पहुंचाया है एक दिन मस्जिद में नमाज के बाद यूसुफ ने आयशा से कहा आयशा भी तुम्हारी नेकी और दुआ ने मुझे यहां तक पहुंचाया है मैं तुमसे इश्क करता हूं मगर यह इश्क अल्लाह की रजा के लिए है मैं तुम्हारे वालिद से तुम्हारा हाथ मांगना चाहता हूं आयशा की आंखें नम हो गई उसने कहा यूसुफ भाई मेरे दिल में भी तुम्हारे लिए इज्जत और मोहब्बत है मगर मेरे वालिद का फैसला मेरे लिए सब कुछ है यूसुफ ने मौलवी साहब से मशवरा किया मौलवी साहब ने कहा बेटा सादगी और नेकी से निकाह कर अल्लाह तुम्हारी जिंदगी में बरकत देगा यूसुफ ने अपने बाप इब्राहिम से बात की इब्राहिम ने कहा बेटा अगर तेरा इश्क नेक है तो अल्लाह उसे कामयाब करेगा यूसुफ आयशा के घर गया और हाजी साहब से बड़े अदब से कहा हाजी साहब मैं आयशा का हाथ मांगने आया हूं मेरी मेहनत और अल्लाह की रहमत से अब मैं आपके खानदान की इज्जत रख सकता हूं हाजी साहब ने यूसुफ की मेहनत नेकी और सादगी को देखा उन्होंने मोहल्ले के बड़ों से मशवरा किया बानोबी ने कहा हाजी साहब यूसुफ जैसा लड़का आयशा के लिए बिल्कुल सही है हाजी साहब ने मौलवी साहब से बात की मौलवी साहब ने कहा यूसुफ और आयशा दोनों नेक हैं उनका निकाह अल्लाह की रजा से होगा हाजी साहब ने आखिरकार इजाजत दे दी उन्होंने कहा यूसुफ तू मेरे लिए बेटे जैसा है आयशा को तुझसे बेहतर कोई नहीं मिलेगा यूसुफ और आयशा का निकाह मस्जिद में सादगी से हुआ मोहल्ले के लोग जमा हुए और दुआएं दी मौलवी साहब ने निकाह पढ़ाया और कुरान की आयतें सुनाई और हमने तुम्हें जोड़ों में पैदा किया ताकि तुम सुकून पाओ यूसुफ ने आयशा को मेहर के तौर पर एक छोटी सी चांदी की अंगूठी दी जो उसने अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी थी आयशा ने मुस्कुराकर अंगूठी कबूल की निकाह के बाद मोहल्ले में छोटी सी दावत हुई यूसुफ और आयशा ने यतीम खाने के बच्चों को अपने साथ बिठाया हामिद ने यूसुफ से कहा भाई आज आप बहुत खुश दिख रहे हैं यूसुफ ने हंसकर कहा बेटा अल्लाह की रहमत से आज मेरा दिल सुकून में है आयशा ने बच्चों को मिठाई बांटी और कहा यह दिन अल्लाह की नेमत है तुम सबके लिए दुआ करो यूसुफ और आयशा की कहानी मोहल्ले के लिए एक मिसाल बन गई लोग कहते यूसुफ की मेहनत और आयशा की नेकी ने इस मोहल्ले को रोशन कर दिया यूसुफ अक्सर सोचता अल्लाह उसकी सुनता है जो मेहनत सच्चाई और नेकी के रास्ते पर चलता है आयशा की दुआ और नेकी ने मुझे यह मंजिल दी आयशा अपने दिल में शुक्र करती यूसुफ की मेहनत ने मुझे सच्चे इश्क का मतलब सिखाया